भारत ने बुधवार को एंटी सैटलाइट मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है. इस परीक्षण के दौरान 300 किलोमीटर की दूरी पर एक अपने ही उपग्रह को मार गिराया. इससे पहले सैटलाइट किलर मिसाइल केवल चीन, अमरीका और रूस के पास थी लेकिन भारत भी अब इस कतार में शामिल हो गया है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम संबोधन में अंतरिक्ष में भारत की इस उपलब्धि की जानकारी दी. उन्होंने कहा कि भारत अब अंतरिक्ष में महाशक्ति बन गया है. इस ऐलान के बाद विपक्षी दलों ने भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई दी लेकिन साथ ही पीएम मोदी पर कई सवाल भी खड़े कर दिए.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया, “वेल डन डीआरडीओ, आपके काम पर हमें बहुत गर्व है. मैं इस अवसर पर प्रधानमंत्री को भी ‘वर्ल्ड थियेटर डे’ की बधाई देना चाहता हूं”. आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि इस तरह की घोषणा ISRO, DRDO के जरिए की जानी चाहिए थी, लेकिन प्रधानमंत्री चुनावी माहौल के कारण खुद इस प्रकार की घोषणाएं कर रहे हैं.

‘मैस्च्युसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी’ में राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर विपिन नारंग कहते हैं, “परीक्षण का वक्त सिर्फ एक संयोग नहीं है. लोकसभा चुनाव नजदीक है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी को सुरक्षा मुद्दों पर सख्त दिखाना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का टेलिविजन पर आकर घोषणा करना 2008 के चीनी परीक्षण के बिल्कुल उलट था जिसे गोपनीयता की परतों में रखा गया. भारत का परीक्षण घरेलू राजनीति के बारे में बहुत ही स्पष्ट था.”

चीन ने 12 साल पहले 2007 में ही एंटी सैटेलाइट सिस्टम का परीक्षण कर अपने एक मौसमी उपग्रह को मार गिराने में सफलता पाई थी लेकिन उसने इसे बिल्कुल गोपनीय रखा. चीन के इस कदम पर अमेरिका ने कड़ी आपत्ति जताई थी.

हार्वर्ड के एस्ट्रोनॉमर जोनाथन मैकडॉवल के मुताबिक, “चीन का परीक्षण इसलिए भी हैरान करने वाला था क्योंकि इससे पहले 20 सालों में अंतरिक्ष की दुनिया में हथियारों का प्रदर्शन नहीं हुआ था. यह लंबे वक्त से कायम प्रतिरोध को तोड़ने वाला था.”

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